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गणतंत्र दिवस 2025

प्रस्तुतकर्ता: मधु कुमारी (Madhu Kumari)

[1. जोरदार आगाज़]


"कुछ नशा तिरंगे की आन का है,
कुछ नशा मातृभूमि की शान का है।
हम लहराएंगे हर जगह ये तिरंगा,
नशा ये हिंदुस्तान की शान का है!"

[2. अभिवादन]


परम आदरणीय मुख्य अतिथि महोदय, ज्ञान के सागर हमारे शिक्षक गण, और मेरे सामने बैठे भारत की उम्मीद—मेरे प्यारे युवा साथियों। आप सभी को 77वें गणतंत्र दिवस की बहुत-बहुत बधाई!

[3. क्यों मनाया जाता है आज का दिन?]


15 अगस्त 1947 को हमें अंग्रेजों से आज़ादी मिली थी, हमारा शरीर आज़ाद हुआ था। लेकिन देश को चलाने के लिए नियम चाहिए थे।

तब 26 जनवरी 1950 को भारत का संविधान लागू हुआ। इसी दिन भारत सही मायनों में एक 'गणतंत्र' बना। यानी, अब राज उसका नहीं होगा जिसकी लाठी में दम है, बल्कि राज उसका होगा जिसे जनता चुनेगी।

[4. महापुरुषों को नमन]


हमें नमन करना होगा बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर को, जिन्होंने 2 साल, 11 महीने और 18 दिन की तपस्या से हमें दुनिया का सबसे महान संविधान दिया। यह उनकी ही कलम की ताकत है कि आज एक साधारण नागरिक भी अपने हक़ के लिए लड़ सकता है।

[5. बलिदानियों की याद में]


शहीद-ए-आज़म भगत सिंह, चंद्रशेखर आज़ाद, सुभाष चंद्र बोस... वो अपनी जवानी जीने के लिए नहीं, बल्कि वतन पर कुर्बान करने के लिए पैदा हुए थे।

"जशन आज़ादी का मुबारक हो देश वालों को,
लेकर फिर से याद उन शहीदों की कुरबानी को।"

[6. सरहद का दर्द - Emotional]


सियाचिन में एक जवान का शरीर तिरंगे में लिपटकर घर आया। उसकी माँ रो रही थी।

तभी साथी फौजी ने कहा—"माजी, इसने अपना वादा निभाया है। इसने सिर्फ आपके घर का नहीं, बल्कि पूरे 140 करोड़ हिंदुस्तानियों के घर का ख्याल रखा है, इसलिए आज वो इस तिरंगे में लिपटा है।"

[7. आज की सच्चाई]


आज 'देशभक्ति' सिर्फ WhatsApp Status तक रह गई है। हम सिस्टम को गाली देते हैं, लेकिन खुद हेलमेट नहीं पहनते।

मेरे भाईयों और बहनों, देश तब बदलेगा जब हम सड़क पर पड़े कचरे को उठाकर डस्टबिन में डालेंगे और ईमानदारी से अपना काम करेंगे।

[8. युवा शक्ति और संकल्प]


हमें धर्म और जाति की दीवारों को तोड़ना होगा। याद रखना— गोलियों का कोई धर्म नहीं होता, और शहीदों की कोई जाति नहीं होती। उनका बस एक ही धर्म था—'हिन्दुस्तान'।

[9. दमदार समापन]


"ना सरकार मेरी है, ना रौब मेरा है,
ना बड़ा सा नाम मेरा है।
मुझे तो बस एक ही बात का गौरव है,
कि मैं 'हिन्दुस्तान' का हूँ, और ये 'हिन्दुस्तान' मेरा है!"

बोलो भारत माता की... जय!

वंदे... मातरम!